जयपुर की सावी और भाव्या ने 12 दिन तक साइकिल चलाकर 300 किमी का सफर तय किया। उनका मिशन है डोल का बध जंगल को बचाना, जो विकास के नाम पर खतरे में है।
जयपुर की दो नन्हीं बहनें, सावी और भाव्या, ने वह कर दिखाया जो बड़े-बड़े सोच भी नहीं सकते। इन बहनों ने साइकिल से 300 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके दिल्ली पहुंचकर पर्यावरण संरक्षण का एक मजबूत संदेश दिया। उनका मकसद था डोल का बध जंगल को बचाने के लिए प्रधानमंत्री से गुहार लगाना, जो विकास परियोजनाओं के कारण खतरे में है।
डोल का बध जंगल, जयपुर के दक्षिणी हिस्से में फैला लगभग 100 एकड़ का घना जंगल है। यह जंगल भूजल रिचार्ज, बाढ़ नियंत्रण और जैव विविधता के लिए बेहद अहम है। यहां 85 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां, मोर, नीलगाय और कई दुर्लभ जीव पाए जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में विकास के नाम पर इस जंगल का बड़ा हिस्सा काटा जा चुका है।
13 साल की सावी ने बताया कि जब वह 9 साल की थीं, तभी उन्हें इस जंगल के खतरे का अहसास हुआ। उसी समय उन्होंने इसे बचाने का संकल्प लिया। उनकी 7 साल की छोटी बहन भाव्या भी अब इस मुहिम में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। दोनों बहनों ने 12 दिन तक हर दिन 25-30 किलोमीटर साइकिल चलाकर यह यात्रा पूरी की। भले ही उनकी PM से सीधी मुलाकात नहीं हो सकी, लेकिन उनका संदेश साफ है—जंगल को बचाने का उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक यह सुरक्षित नहीं हो जाता।
डोल का बध बचाओ आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी सरकार से मांग की है कि जंगल में पेड़ों की कटाई तुरंत रोकी जाए। इसके अलावा, वैकल्पिक विकास योजनाओं पर विचार हो और किसी भी निर्माण से पहले स्वतंत्र समिति की निगरानी सुनिश्चित की जाए।
