दुनिया का सबसे खतरनाक स्टील्थ बॉम्बर B-2 स्पिरिट, जिसने हाल ही में ईरान पर हमले में अपनी ताकत दिखाई, उसके पीछे एक भारतीय वैज्ञानिक का दिमाग था। नोशीर गोवाडिया, जिन्होंने इस बॉम्बर की इंफ्रारेड सप्रेसिंग टेक्नोलॉजी और लो रडार क्रॉस सेक्शन डिजाइन किया, आज अमेरिका की जेल में बंद हैं। यह कहानी है एक प्रतिभाशाली वैज्ञानिक के उत्थान और पतन की।
B-2 बॉम्बर की अद्वितीय क्षमता
B-2 स्पिरिट बॉम्बर दुनिया का सबसे उन्नत स्टील्थ बॉम्बर है, जिसकी कीमत लगभग 4 बिलियन डॉलर है। इसकी खासियतें हैं:
- लो रडार क्रॉस सेक्शन: यह रडार में नहीं दिखता।
- इंफ्रारेड सिग्नेचर कम होना: चार इंजन होने के बावजूद इसकी हीट डिटेक्ट नहीं होती।
- लॉन्ग रेंज: बिना रुके लंबी दूरी तक उड़ान भर सकता है।
- भारी पेलोड: 18,000 किलोग्राम तक के हथियार ले जा सकता है।
इसकी स्टील्थ टेक्नोलॉजी का श्रेय नोशीर गोवाडिया को जाता है, जिन्होंने इसके एग्जॉस्ट सिस्टम को डिजाइन किया था।
नोशीर गोवाडिया: एक प्रतिभाशाली मस्तिष्क
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
- जन्म: 11 अप्रैल 1944, मुंबई, भारत।
- मेधावी छात्र: महज 15 साल की उम्र में एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी की उपलब्धि हासिल की।
- अमेरिका पलायन: 1963 में अमेरिका चले गए और 1969 तक अमेरिकी नागरिक बन गए।
करियर की शुरुआत
1968 में नॉर्थ्रॉप ग्रुमन (तब नॉर्थ्रॉप कॉर्पोरेशन) में डिजाइन इंजीनियर के रूप में शामिल हुए। यहीं पर B-2 बॉम्बर प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया।
B-2 बॉम्बर में गोवाडिया का योगदान
1. इंफ्रारेड सिग्नेचर कम करने वाला एग्जॉस्ट सिस्टम
- B-2 के चारों इंजन से निकलने वाली गर्मी को कूल करने और डिफ्यूज करने का सिस्टम डिजाइन किया।
- एग्जॉस्ट को प्लेन के ऊपरी हिस्से में रखा गया ताकि हीट सिग्नेचर कम हो।
2. लो रडार क्रॉस सेक्शन
- रडार अवशोषित सामग्री (RAM) का उपयोग करके बॉम्बर को रडार में अदृश्य बनाया।
- विशेष एयरफ्रेम डिजाइन से रडार वेव्स को स्कैटर किया गया।
गिरफ्तारी और जेल की सजा
2005 में गोवाडिया पर अमेरिकी रक्षा तकनीक चीन, इजरायल और स्विट्जरलैंड को लीक करने का आरोप लगा। उन्हें 32 साल की सजा सुनाई गई, जिसमें से 16 साल वह पहले ही काट चुके हैं।
आरोपों के पीछे की वजह
- पैसा नहीं, बल्कि पहचान की चाह: कहा जाता है कि अमेरिकी डिफेंस सेक्टर में नस्लीय भेदभाव के कारण उन्हें उचित सम्मान नहीं मिला।
- चीन को सस्ते में टेक्नोलॉजी बेची: J-20 स्टील्थ फाइटर और H-20 बॉम्बर के डिजाइन में गोवाडिया की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ।
नोशीर गोवाडिया की कहानी एक प्रतिभाशाली वैज्ञानिक के गुमनामी और संघर्ष की दास्तान है। उनकी डिजाइन की हुई टेक्नोलॉजी आज भी अमेरिकी सेना की ताकत बनी हुई है, लेकिन वह खुद जेल की सलाखों के पीछे हैं। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि प्रतिभा और महत्वाकांक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है।
