रूस और पाकिस्तान ने हाल ही में एक दीर्घकालिक औद्योगिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें पाकिस्तान स्टील मिल्स (PSM) को पुनर्जीवित करने की योजना शामिल है। यह समझौता मास्को में पाकिस्तान के उद्योग सचिव सैफ अंजुम और रूसी कंपनी एलएलसी के निदेशक व्लादिमीर विलेज के बीच हुआ। यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा दे सकता है, लेकिन इसके भू-राजनीतिक प्रभावों को लेकर भारत को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
ऐतिहासिक संदर्भ: रूस-पाकिस्तान संबंध
ऐतिहासिक रूप से रूस और पाकिस्तान के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। 1979-89 के सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ मिलकर मुजाहिदीनों को समर्थन दिया था, जिससे सोवियत संघ को भारी नुकसान हुआ। हालांकि, हाल के वर्षों में चीन, रूस और ईरान के बीच बढ़ते सहयोग ने पाकिस्तान को रूस के करीब ला दिया है।
भारत के लिए चुनौतियाँ
- सामरिक चिंताएँ: पाकिस्तान का रूस और चीन के साथ गहरा सहयोग भारत की सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। यदि पाकिस्तान अपने यहाँ रूसी निवेश बढ़ाता है, तो भारत के लिए आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करना और भी मुश्किल हो सकता है।
- अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच: रूस पाकिस्तान के माध्यम से मध्य एशिया और बंगाल की खाड़ी तक पहुँच बनाना चाहता है। यदि पाकिस्तान में रेल और सड़क नेटवर्क मजबूत होता है, तो यह चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) की तरह एक नया भू-राजनीतिक खेल शुरू कर सकता है।
- आतंकवाद को समर्थन: पाकिस्तान की आईएसआई को अंतरराष्ट्रीय फंडिंग मिलने से आतंकी गतिविधियाँ बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
क्या पाकिस्तान वास्तव में बदलेगा?
पाकिस्तान आर्थिक संकट से जूझ रहा है और उसे विदेशी निवेश की सख्त जरूरत है। हालाँकि, अतीत में ऐसे कई समझौते केवल कागजी साबित हुए हैं। चीन का CPEC प्रोजेक्ट भी अधूरा है और बलूचिस्तान में सुरक्षा चुनौतियाँ बनी हुई हैं। यदि रूसी निवेश भी इसी तरह अप्रभावी रहता है, तो पाकिस्तान को कोई बड़ा लाभ नहीं होगा।
भारत की रणनीति क्या होनी चाहिए?
- सैन्य तैयारियाँ बढ़ाना: पाकिस्तान के साथ सीमा पर निगरानी और सैन्य तैयारी मजबूत करनी होगी।
- अंतरराष्ट्रीय दबाव: भारत को अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ मिलकर पाकिस्तान पर आतंकवाद के समर्थन के लिए दबाव बनाना चाहिए।
- वैकल्पिक मार्गों का विकास: मध्य एशिया तक पहुँच के लिए भारत को ईरान के चाबहार बंदरगाह और अफगानिस्तान के साथ संबंध मजबूत करने होंगे।
निष्कर्ष
रूस-पाकिस्तान समझौता भू-राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके दीर्घकालिक परिणाम अभी अनिश्चित हैं। भारत के लिए जरूरी है कि वह सतर्क रहते हुए अपनी सुरक्षा और कूटनीतिक रणनीतियों को मजबूत करे। पाकिस्तान की आंतरिक अस्थिरता और आर्थिक कमजोरियाँ इस समझौते को भी विफल कर सकती हैं, लेकिन भारत को किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहना होगा।